35 साल बाद भारत मे सम्पूर्ण शिक्षा पद्धति में बदलाव

-अबतक भारत की शिक्षा व्यवस्था 10+2 के फ़ोर्मेट पर चलती थी। पर अब इसे 5+3+3+4 के फ़ोर्मेट में परिवर्तित कर दिया जाएँगा।

-स्कूल के प्रथम 5 वर्ष को फ़ाउंडेशन स्टेज माना जाएगा। जिसमें प्री-प्राइमरी के 3 वर्ष और पहली तथा दूसरी कक्षा के 2 वर्ष शामिल होंगे।

-किताबों का बोज़ अब पहले जितना नही रहेगा, और बच्चों को खेल कूद, मेंटल मोरल स्किल, साइको मोटर एक्टिविटी वगेरा करवाई जाएगी।

-सेकण्ड स्टेज के 3 वर्षों में छात्र को भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा, और छत्रों का परिचय विज्ञान, गणित, कला और ह्यमनिटी जैसे विषयों से करवाया जाएगा।

-इसके अगले 3 साल मिडल स्टेज माने जाएगे जिसमें सिलेबर्स के अनुसार पढ़ाया जाएगा।

-और अंत के 4 वर्षों के दौरान छत्रों में किसी विषय के प्रति गहरी समज पैदा की जाएगी। और उन्हें किसी एक विषय में महारथ बनाया जाएगा।

-प्रत्येक विध्यार्थी अब कम से कम एक स्किल के साथ स्कूलिंग खतम करेगा।

-शिक्षा का करिक्यूलम NCERT द्वारा तैयार किया जाएगा।

-अब साइंस, कोमर्स और आर्ट्स मे कोई भेद नही होगा। स्कूल के स्ट्रीम सिस्टम को ही खतम कर दिया गया है। यानी अब छात्र एक साथ अन्य स्ट्रीम के विषय भी पढ़ सकते हो। (अब छात्र अपनी रुचि अनुसार मर्ज़ी के विषय पढ़ सकते है। मतलब वो फ़िज़िक्स के साथ एकाउंट और सायकोलोजि के साथ बायोलोजि भी पढ़ सकता है)

-अगर छात्र चाहे तो कक्षा 6 से ही कोडिंग की पढ़ाई शुरू कर सकता है। यानी अब सोफ्टवेर, AI और कोडिंग के लिए छात्र को छोटी उमर से ही तैयार किया जाएगा। और इसके बाद अगर छात्र चाहे तो इसके प्रेक्टिकल नोलेज के लिए इंटनशिप भी कर सकता है।

-माना जाता है की इस शिक्षा प्रणाली मे रट्टा लगाने की पद्धति को खतम कर दिया गया है। और अब छात्र की क्षमता अनुसार उसकी परीक्षा होगी।

-कोलेज की शिक्षा पद्धति मे इस तरह बदलाव किया गया है की अगर आप डिग्री के 3 वर्ष पूरे करते हो तो आपको डिग्री तो मिलेगी ही, पर यदि आप किसी कारण वश एक साल के बाद कोलेज छोड़ देते हो तो उसे एक वर्ष का सर्टिफ़िकेट कोर्स माना जायेगा। और यदी दो साल की पढ़ाई के बाद कोलेज छोड़ते हो तो उसे डिप्लोमा दिया जाएगा।

-ये शिक्षा प्रणाली भारतीय विध्यार्थीयो के लिए सच मे एक सूर्योदय समान है।

-आशा है अब भारत से प्राचीन भारत के जैसे खोजक और आविष्कारक जन्म लेंगे।

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