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हमें सपने क्यों आते है?

सपने आने का निश्चित साइंटिफिक कारण तो आज तक वैज्ञानिक नहीं जान पाए है पर उस कारण की खोज में वो स्वप्न के बारेमे बहोत कुछ जानने में कामियाब रहे है. संसोधनो के अनुसार नींद में हमारा कुछ समय अगर स्वप्न देखने में ना बिते तो दिमाग और मन तंदुरस्त नहीं रह सकते.

सपने नींद में अनुभव किये हुए अजागृत मन के विचार मात्र है. कई लोग कहेते है के उन्हें सपने नहीं आते, पर सच तो ये है के उन्हें स्वप्न आते है पर याद नहीं रहेते. हम अक्सर रात में देखे सपनों को सुबह तक भूल जाते है. पर कुछ सपने हमे याद रहे जाते है. स्वप्न हमारे सुसुप्त विचार, भावनाए और संवेदनाओ का प्रतिबिम्ब है जो हमारे अजागृत मन में संग्रहित स्मुतिया है. सपनों के विश्लेषण के संबंध में “सिगमंड फ्रायड” का कथन है कि “सपने उन दमित इच्छाओं को व्यक्त करते हैं जो मस्तिष्क के अंधेरे कोने में घर किये रहते हैं’. ये बात तय है के स्वप्न हमारे लिए निश्चित ही उपियोगी है, अगर ऐसा ना होता तो क्रमिक विकास के दरमियाँन कालानुसार कुदरत ही स्वप्न की प्रक्रिया को दिमाग से नाबूद कर चुकी होती.

सपनों का विज्ञान:

अमेरिकन वैज्ञानिक “रॉबर्ट मेकरली” और “एलेन होब्सन” द्वारा सन 1977 में दी गई स्वप्न विश्लेषण की थियरी के अनुसार स्वप्न हमारे दिमाग में Brain-Stem नाम की जगह में उत्पन्न होते है. Brain-Stem हमारे दिमाग के निचे के हिस्से में स्थित होता है. नींद को कंट्रोल करने वाले दो तरह के चेताकोष (Nerve-Cell) इस हिस्से में मोजूद होते है. जो संदेश के वहन के लिये दो अलग-अलग तरह के न्युरोट्रांसमीटर्स का उपयोग करते है, और वो भी कभी एक साथ नहीं. न्युरोट्रांसमीटर्स वास्तव में Brain-Chemical (रसायन) है. दिमाग के अनेक चेताकोष (Nerve-Cell) इन केमिकल (रसायनो) का संदेश के आदान-प्रदान के लिए उपयोग करते है. इस तरह प्रत्येक चेताकोष अपने आसपास के दुसरे चेताकोषो के संपर्क में रहेता है.

दिमाग में Brain-Stem कहे जाने वाले हिस्से में मौजूद दो मेसे एक चेताकोष नींद के समय “नोरेपिनेफाइन” (Norepinephrine) नाम के न्युरोट्रांसमीटर (रसायन) को मुक्त करता है. इन्सान इस समय निद्रा अवस्था में पहोच जाता है. और ये नींद स्वप्न रहित होती है. एक चेताकोष 90 मिनिट के बाद जैसे ही स्विच-ऑफ होता है वैसे ही तुरंत दूसरा चेताकोष एक्टिव हो जाता है. और एसिटिलकोलाइन (Acetylcholine) नाम के न्युरोट्रांसमीटर को रिलीस करता है. और यहाँ से शुरू होती है REM (Rapid Eye Movement) अवस्था. इस अवस्था में एसिटिलकोलाइन नाम का रसायन दिमाग के उपरी भाग में स्थित Cortex नामक केंद्र को उत्तेजित कर देता है. और Cortex सपने बुनने लगता है. यु अगर देखे तो प्रत्येक स्वप्न कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), नाइट्रोजन (NO) और ओक्सिजन (O2) मतलब एसिटिलकोलाइन का कोकटेल है.

रॉबर्ट मेकरली” और “एलेन होब्सन नाम के उन दो अमेरीकन वैज्ञानिकोने एक प्रयोग भी किया था, जिसमें उन्होंने एक बिल्ली के Brain-Stem में इंजेक्सन के माध्यम कुत्रिम रासायन दाखिल किया. बिल्ली तुरंत ही REM अवस्था में पहोच गई और सपने देखने लगी.

स्वप्न क्यूँ उत्पन्न होते है?

यहाँ पर हम ये तो जान पाए के स्वप्न किस तरह उत्पन्न होते है, पर प्रश्न ये उठता है के स्वप्न क्यूँ उत्पन्न होते है?
इसका जवाबा ये है के, जागृत अवस्था में दिमाग और मन के ऊपर असंख्य विचार, भावनाए और संवेदनाओ का अटेक चलता रहेता है. हमारा दिमाग उस समय तो उन सब चीजों को स्टोर कर लेता है पर रात में निन्द्रवस्था में उसे इस सारे स्टफ् में से बेकार चीजों को साफ़ करना पड़ता है जिससे मेमरी को राहत मिले और दिमाग तंदुरस्त रहे. इस लिए बिनजरुरी मेमरिज़ को दिमाग स्वप्न का रूप देकर उसे डिस्चार्ज करता है. और बाकि बची मेमरी को दिमाग वर्गीकृत कर के उसे व्यवस्थित तरीके से स्टोर कर देता है. जिस से मेमरिज़ को रिकोल करना आसन हो सके.

बात यही ख़तम नहीं होती. स्वप्न के विषय में भविष्य में हमे और ज्यादा माहिती उपलब्ध होने वाली है. इस पर रिसर्च जारी गई…

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