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विटामिन डी (Vitamin D)

विटामिन D की शोध अमेरिका की केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिको ने सन 1967 में की थी. वास्तव में यह विटामिन न होकर एक स्टेरॉईड होर्मोन है. A, B-कोम्प्लेक्स और C जेसे विटामिन हमे बहार से मिलते है जब की D3 नाम का ये होर्मोन सूर्यप्रकाश की हाजरी में हमारे शरीर के अन्दर त्वचा के भीतर बनता है.

विटामिन D का रासायनिक (वैज्ञानिक) नाम Cholecalciferol है, लेकिन आम तौर पर इसे विटामिन D के नाम से ही जाना जाता है. शरीर में सूर्यप्रकाश की मोजुदगी में त्वचा के निचे Cholecalciferol नाम का ये होर्मोन उत्पन्न होने के बाद लीवर और किडनी के साथ जैविक-क्रिया करके अपना स्वरुप बदल देता है, और खोराक में से मिले केल्शियम को हड्डियों के गठन के लिए अवशोषित करता है. विटामिन D के बिना हमारे शरीर में अकेला सिर्फ केल्शियम किसी काम का नहीं.

जीवन भर हड्डियों की मजबूती और स्वास्थ्य के लिए हमे रोजाना 20-25 मिनिट तक शरीर की 30% त्वचा खुली रहे उस तरह से सूर्यस्नान करना चाहिए. सुबह के नर्म सूर्यप्रकाश के बदले दोपहर के 11 से 12 बजे तक का प्रकाश यथा योग्य है, क्योंकी इस समय में सूर्यप्रकाश में 280 से 300 “नेनोमीटर शोर्ट वेव अल्ट्रावायोलेट-बी” किरणे होती है जिनसे शरीर में विटामिन D बनता है.

भारत में सूर्यप्रकाश की कमी नही, इसलिए हमे यह गलतफेमि होती है के हमारे देश में लोगो को प्रत्याप्त मात्र में विटामिन D मिलाता होगा, परंतु सच इससे विपरीत है. आंकड़ो के मुताबिक हमारे देश में वयस्क उम्र के 75% से 80% लोगो में विटामिन D की कमी पाई गई है. परिणाम स्वरुप कम उम्रमे ही लोग थकान, कमजोरी, दर्द और कमजोर हड्डियो की बीमारी से जुज रहे है.

इस समस्या के लिए ज़िम्मेदार कुछ कारण है. जेसे के, पर्याप्त सूर्यप्रकाश मिलाने के समय हम घरोमे या ऑफिस में होते है और बच्चो को भी घरोमे ही रहेने की सलाह दी जाती है. हो सके उतना हम हमारी त्वचा को सूर्यप्रकाश से बचाकर रखते है, हम सूर्यस्नान के लिए समय भी नहीं निकाल पाते है. इन वजहों से मानव शरीर को रोजाना 1000 IU जितना विटामिन D3 प्राप्त ही नहीं हो पाता. जिसके चलते कम उम्रमे ही हमारी हड्डिय कमजोर हो जाती है और शाधारण सी चोट से भी टूट जाती है.

अगर पर्याप्त मात्र में हमने खाने में केल्शियम और रोजाना 20 से 25 मिनिट सूर्यप्रकाश नहीं लिया तो ये जीवनशैली हमे भविष्य में महेंगी पड़ने वाली है.

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