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“माँ-बाप ने ये क्या कर दिया?”

“माँ-बाप ने ये क्या कर दिया?”
(Don’t take it easy)
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आज ज़्यादातर माता-पिता अपने बच्चे को सर्वश्रेस्ट महोल और सुख सुविधा देकर एक भौतिकवादी इंसान बनाना चाहते है। लेकिन जब मैं ये देखता हु तो मुजे बहोत दुःख होता है। क्योंकी ऐसे बच्चे बड़े होकर डरपोक, निर्बल और कायर पुरवार होते है।
अब आप प्लीस अपने बचाव के लिए तो मुझे बिलकुल मत कोसना, क्यूँकि मेरे पास पर्याप्त प्रमाण है।
..मैं एक मनोवैज्ञानिक हु, और मेरे कार्यकाल में मैं रोज़ एक नई समस्या देखता हु जिसको मैंने एक नाम दिया है। “माँ-बाप ने ये क्या कर दिया?”
कुछ उदाहरण देता हूँ।
= 24 साल के मोहित को उसकी एंजीनियर की डिग्री लेने मे अब कोई रुचि नहीं रही। क्यूँकि उसे नहीं लगता है के उसे पढ़ाई करनी चाहिए। हाँ लेकिन वो लगातार अपने माँ-बाप से पैसे माँगता रहेता है।
उसने मूँजें बताया की जब उसे कोई काम ना पसंद हो तब उसके माँ बाप ने उसे उस काम को छोड़ देने की सलाह दी।
उसके माता-पिता ने हमेशा ये ख़याल रक्खा है के उसकी परवरिश के दौरान उसे कोई तकलीफ़ ना हो।
= 32 साल के आयुष की यह समस्या है के उसकी पत्नी उसे छोड़ देना चाहती है। इस लिए वो मेरी सलाह लेने आया है। आयुष एक मिकेनिकल एंजिनियर है। लेकिन वो अपना काम स्थिरता और लगन से नहीं कर पाता। उसे बहोत स्ट्रेस रहेता है।
वो हर दो महीने में अपनी समस्याओं को लेकर अपने माँ-बाबा के पास पहोच जाता है। और सोचता है के जब वो छोटा था और स्कूल ना जाने के लिए जब ज़िद करता था तब जैसे उसके माँ-बाबा उसके प्रश्नो के उपाय ढुँद लेते थे बस आज भी वैसे ही उसे उसके माँ-बाबा उपाय बता दे।
= 28 साल की सोफ्टवेर-डेवलोपर अंजलि की 2 साल पहेले ही शादी हुई है। लेकिन वो अपने पति के साथ नहीं रहेना चाहती, क्योंकि ओफिस में बहोत काम रहेता है, और घर का काम भी उसे करना होता है। वो चाहती है के उसके मम्मी-पापा उसके साथ रहे और उसका सारा काम करने में उसे मदद करे।
…ऐसे तो अनेक क़िस्से है।
इन सबका मूल कारण माता-पिता द्वारा बच्चों को अती मात्रा में दी जाने वाली सुख सुविधा और लापरवाही भरी परवरिश है। आप अपने बच्चे को चाहते हो ये अच्छी बात है, लेकिन जब आप उन्हें जीवन की साहजिक विषमताओ से बार-बार बचते रहेते हो तब सच में आप उनसे सही रूप से खिलने का मौक़ा छिन रहे होते है।
परिणाम स्वरूप जब आपका बच्चा वास्तविक दुनिया में जाकर खड़ा रहेंगा तब उसमें लडनेकी शक्ति ही नहीं होंगी। वो बेचैन हो जाएगा, हार जाएगा और परिस्थिति को छोड़ के भाग खड़ा होंगा।
आप अगर अपने बच्चे को वाक़ई में चाहते है तो आपको उसे इसी दुनिया में उसके ख़ुदके पैरों पर खड़ा होना सिखाना होगा।
चाणक्य ने कहा है : एक पेरेंट उसी वक़्त एक शिक्षक नहीं बन सकता और एक शिक्षक उसी समय एक पेरेंट नहीं हो सकता। आपको पेरेंटस से ज़्यादा शिक्षक बनना है…

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