Universe

मंगल ग्रह के ऊपर से क्या दिखता है?

क्या आपको पता है मंगल ग्रह पर क्या दिखाई देता है? हमरी पृथ्वी के पड़ोसी ग्रह मंगल पर लाखों साल पहेले नदियाँ, तालाब, और सागर हुआ करते थे. लेकिन आज इसकी सतह पर पानी का नमोनिशन नहि है. ऊपर से ये पूरा ग्रह आज सुनसान, निर्जन और वीरान बन चुका है.

मंगल का आसमान:

हम मंगल ग्रह से अंतरिक्ष की और नज़र करे तो दूर एक तारे जैसा चमकीला बिंदु दिखाई देता है. ये छोटा सा बिंदु हमारा मातृग्रह है, हमारी पृथ्वी है. इस वीरान ग्रह से लाखों किलोमीटर दूर बसे उस ग्रह पर जीवन पनप रहा है. पर ऐसे नसीब मंगल के कहा. खेर, मंगल के आसमान में उसके दो उपग्रह फोबोस है और डिमोज़ भी दिखते है. और है मंगल ग्रह का सूर्योदय काफ़ी चमकीला होता है. सुबह की हल्की धूप में हमें बादल भी दिख सकते है.

The North Pole

मंगल का उत्तर ध्रुव भी हमारी पृथ्वी की तरह बर्फ़ से ढका है. मानो मंगल का सारा तरल सिर्फ़ बर्फ़ के रूप में नोर्थ पोल पर इकट्ठा हुआ हो. लेकिन ये बर्फ़ सुखी है.

Kasei Valles

इस ग्रह के दक्षिण में Kasei Valles बनी हुई है. ये अमेरिका की ग्रेन केनियन से 10 गुना बड़ी है. वैज्ञानिक मानते है के करोड़ों साल पहेले मौजूद रहे पानी ने इसे बनाया है.

मंगल का Atmosphere:

मंगल पर हमेशा रेतीले तूफ़ान आते रहेते है. धूल के बवंडर उठाते रहेते है. इस लिए, यहाँ अधिक जगहों पर वातावरण हमेशा रेतीला और घना रहेता है. यहाँ की ग्रेविटी पृथ्वी से 38% तक कम है इस लिए कई बार धूल महीनो तक वातावरण में घुली रहेती है. जिस वजह से कभी-कभी लम्बे समय तक सूर्यप्रकाश ज़मीन तक नहि पहोच पाता.

एक बार सन 2007 में यहाँ रेत का इतना बड़ा तूफ़ान उठा था के 6 महीनो तक सूर्याप्रकाश ज़मीन तक पहोच ही नहि पाया था. ये तूफ़ान 2.5 करोड़ स्क्वेर किलोमीटर में फैला था. इस परिस्थिति में नासा ने भेजे हुए रोवर भी बेटरी चार्ज ना हो पाने के कारण ठप्प पड़ गई थे. ऐसा ही एक तूफ़ान अभी कुछ समय पहेले फिर उठा था. जिसमें नासा ने अपना ओपोर्चूनिटी रोवर गवाँ दिया. जून 2001 में तो ऐसा तूफ़ान उठा था के पूरा मंगल ग्रह 55 किलोमीटर ऊँची धूल के बवंडर में ढक गया था. और हबल टेलिसकोप से होने वाला मंगल की सरफ़ेस का निरीक्षण, कई दिन तक रुक गया था.

पर जब धूल के तूफ़ान ना उठे हो, और वातावरण साफ़ हो तब मंगल ग्रह के दूर दूर का नज़ारा साफ़ साफ़ दिखता है. नासा के रोवर्स ने मंगल की कई जहगो की तस्वीरें क़ैद की है. आप उन्ही तस्वीरों को आज देख रहे है.

मंगल के एटमोस्फ़ीयर में 95% कार्बन डायोक्साइड है. यहाँ हवा बेहद पतली है. सूरज के लाल किरण वातावरण के आर-पार घुस जाते है.

-मंगल की सतह Surface:

रेत में आइरन-ओक्साईड की भरमार होने की वजह से साफ़ सुथरे आसमान में मंगल की सतह लाल रंग की लिखाई देती है. चारों तरफ़ बस रेत और पत्थरों वाली ज़मीन दिखती है. सुखी, बंजर, वीरान… पर सच बताए तो यहाँ पर भी हमें मंत्रमुग्ध कर देने वाली कुछ चीज़ें है.

-Valles Marineris (वेलिस मेरिनेरिज) ये ना सिर्फ़ मंगल ग्रह की बल्कि पूरे सोलर सिस्टम की सबसे बड़ी घाटी है. ये घाटी 4000 किलोमीटर लम्बी है. इसकी तुलना भारत के साथ की जाए तो मानो ये कश्मीर से कन्या कुमारी तक पूरे देश में फैली हुई है.

पर इससे भी बड़ा कुतूहल है

-Olympus Mons. ये ज्वालामुखी से बना मंगल ग्रह का सबसे बड़ा माउंटेन है. ये सिर्फ़ मंगल पर ही नहि लेकिन पूरे सोलर सिस्टम में सब से बड़ा माउंटेन है. 22,000 मीटर ऊँचा ये पहाड़ हमारि पृथ्वी के सबसे ऊँचे पर्वत माइंट एवरिस्ट से ३ घुना ऊँचा और काफ़ी बड़ा है.

Temperature

मंगल का तापमान ठंडा है. ये क़रीब -125 डिग्री सेल्सियस से plus 20 तक रहेता है.

Planum Australe

ये मंगल ग्रह का दक्षिण ध्रुव है और ये पूरा का पूरा ice sheet से ढका हुआ है.

आज भी हम इस लाल ग्रह पर खोज कर रहे है और अभी भी इस फेशिनेटिंग दुनिया के कई राज जानने बाक़ी है. हो सकता है यहाँ भुतकाल में जीवन रहा हो या आज भी कही मंगल की सतह के नीचे जीवन पनप रहा हो.

भविषय मे एक दिन ऐसा भी आ सकता है के हम मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने में कमियाब रहे. ईलॉन मास्क की स्पेसX कम्पनी आज इसी मिशन पर काम कर रही है. मंगल पर बस्ती बसाने के विषय में मेने पहेले ही एक विडियो बनाई है. उसे आप डिसक्रिप्शन में…

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