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ब्लू व्हेल मछली (Blue Whale)

समुद्र में रहेने वाले जीवों में व्हेल एक विशालकाय जीव है. जिन में स्पर्म व्हेल, किलर व्हेल, पायलट व्हेल, ब्लू व्हेल आदि जाती की प्रजातीय होती है. इन सब में ब्लू व्हेल सबसे ज़्यादा विशाल होती है. ये मछली लगभग 5 करोड़ साल पहेले अस्तित्व में आइ.

ब्लू व्हेल का दिल इतना बड़ा होता हैं के उसमें से एक मोटरकार निकल सकती है, और ख़ून गर्म होता है. ये मछली अधिक समय तक नहीं सोती, सोते समय इसका आधा मस्तिसक जागृत होता है तो आधा ससुप्त अवस्था में. यह ३० माइल प्रति घंटे मी रफ़्तार से तैरती है.

ये मछली ओसत ३० मीटर लम्बी होती है जिसका वज़न १५० मेट्रीक टन के आस-पास होता हे. आश्चर्य की बात ये है के इतनी विशाल मछली का ख़ोरक उसकी तुलना में बहोत छोटा है. यह मछली पाँच सेंटीमीटर लम्बे क्रिल नाम के जीव पर गुज़रा करती हे. जो दक्षिण ध्रुव के महासागरो में भरपूर मरता में पाए जाते है.
बीसवीं सदी की शुरुआत में ब्लू व्हेल पृथ्वी के लगभग सभी महासागरों में अधिक मात्रा में पाई जाती थी लेकिन लगातार शिकार होने के कारण वह अब विलुप्त होने के कगार पर है.

ब्लू व्हेल के मुँह में दाँत नहीं होते, पर उसकी जगह ब्रश के तार जेसे मोटे रेशे होते है, जिसे baleen कहेते है. ब्लू व्हेल जब मुँह खोलती है तब ५० मेट्रीक टन जितना पानी मुँह में लेती हे, और अपनी जीभ से दबाव डालती हे. जिस से ब्रश जेस रेशों (baleen) से होकर पानी बाहर चला जाता है और क्रिल नाम की उसकी खुराक उसके मुँह में ही फँसीं रहेती है. और व्हेल उसे निगल जाती है. और दूसरे निवाले के लिए वो फिर से अपना मुँह खोलती है.

ब्लू व्हेल अपने क़द के अनुसार १५,००,००० केलेरी तक की खुराक चाहिए जिस कारण वो रोज़ाना चार करोड़ जितने क्रिल निगल जाती है. जनयुआरी से एप्रिल तक व्हेल टैंज़ में ख़ोरक खा कर अपनी चरबी को बाधा लेती है। जिस वजह से उसके वज़न में ३६-४०% की वृद्धि होती है. बाक़ी के महीनो में व्हेल विशववृत की और ५००० किलोमीटर तक ऋतुपरवास करती है जिसमें उसकी बचाई हुई चरबी उसके काम आती है.

ब्लू व्हेल आज ख़त्म होने की कगार पर पहोच गई है और मनुष्य ही इस मछली का सबसे बड़ा दुश्मन है. हमारी सूजबूज और संरक्षण हाई इस ब्लू व्हेल को जीवनदान दे सकता है..

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