Universe

ब्रह्मांड की सभ्यताए Civilizations of the Universe in Hindi

अविरत ब्रह्माण्ड के किसी एक छोटेसे कोने में हमारी गेलेक्सी आकाशगंगा स्थित है. और 250,000,000,000 से भी ज्यादा तारो से समृद्ध हमारी आकाशगंगा के किसी एक कोने में हमारा सौरमंडल मौजूद है. जिसके 7.5 Billion Kilometers के विस्तार में हमारी छोटीसी पृथ्वी पर जीबन पनप रहा है. धरती पे वनस्पति और पशु-पक्षी से उन्नत हम इन्सान एक विकसित जिव के रूप में उभरे है. पर क्या हम इस अनंत ब्रह्माण्ड में अकेले है? जवाब है बिलकुल नहीं. वैज्ञानिक अध्ययन से ये मालूम हुआ है के ब्रह्माण्ड में हम से करोडो प्रकाशवर्ष दूर कई गेलेक्सीस में जीवन के होने की पूर्ण संभावनाये है. जहा पर हमसे निम्न अथवा उच्च कोटि के जीवो का बसेरा हो सकता है.

रशियन साइंटिस्ट निकोलाई कार्दाशेव ने ब्रह्माण्ड की सभ्यताओ के विकसित होने का पैमाना बनाया है। उनके हिसाब से ब्रह्माण्ड में सभ्यताएँ टाइप 1 से लेकर टाइप 4 तक हैं. मानव सभ्यता अभी तक टाइप 1 तक भी नहीं पहोची. ये पैमाना ऊर्जा पर आधारित है. क्यूंकी इतिहास गवाह है की विकास और ऊर्जा का उपयोग हमेशा साथ साथ आगे बढ़ते हैं. आइये देखते है ब्रह्माण्ड में विविध सभ्यताओ के विकास का पैमाना…

टाइप 1 सभ्यता: प्रथम चरण की सभ्यता वो है जो अपने ग्रह पर उपलब्ध सभी ऊर्जा स्त्रोत का पूरा पूरा इस्तेमाल कर सकती हो. यह सभ्यता अपने ग्रह पर पडने वाले समस्त सूर्य प्रकाश (मातृ तारे के प्रकाश) का उपभोग कर सकती है. यह सभ्यता इतनी विकसित होती है की अपने ग्रह पर पूरा नियंत्रण रख सकती है. अपने गृह के मौसम और जलवायु जैसी चीजों पर उसका पूरा नियंत्रण होगा. और इस लेवल तक पहुँचने के बाद यदि कोई चाँद जितना बड़ा उल्कापिंड भी उनके ग्रह से टकराने की दिशा में गतिमान हो तब भी वे उसे उसके पथ में ही वाष्पीकृत कर सकते हैं. क्यूंकी उनके पास इतने विशालकाय ऊर्जा स्त्रोत हैं की जिसके इस्तेमाल से वे ऐसा कर पाएंगे. हम तभी टाइप 1 सभ्यता हो पाएंगे जब हम सूर्य से मिलने वाली सारी ऊर्जा को इस्तेमाल करना सीख लेंगे.

टाइप 2 सभ्यता: यह सभ्यता अपने मातृ तारे की समस्त ऊर्जा का उपयोग कर सकती है, जिससे यह सभ्यता टाइप 1 की सभ्यता से 10 अरब गुणा ज्यादा शक्तिशाली हो जाती है. स्टार ट्रेक मे “फेडरेशन आफ प्लेनेट” इसी तरह की सभ्यता है. यह सभ्यता अमर है, विज्ञान के हर रहस्य का इन्हे ज्ञान है. इन्हे हिम युग, उल्कापात, धूमकेतु की टक्कर या किसी सुपरनोवा विस्फोट का भय नही है. इनके मातृ तारे के नष्ट होने की संभावना पर ये सभ्यता किसी दूसरे तारे के ग्रह पर जाकर बसने मे सक्षम है। शायद ये अपने ग्रह को ही दूसरे तारे तक लेजा सकते है. इस लेवल तक पहुँचने वाली सभ्यता को कोई बाहरी संकट मिटा नहीं सकता. इस तरह ये सभ्यता उस स्थिति को प्राप्त कर लेती है की अब उसका मिटना नामुमकिन ही है।

टाइप 3 सभ्यता: यह सभ्यता संपूर्ण आकाशगंगा की ऊर्जा का उपभोग कर सकती है। यह टाइप 2 की सभ्यता से अरबो गुणा ज्यादा शक्तिशाली है. स्टार ट्रेक की “बोर्गसभ्यता” या स्टार वोर की “एम्पायर सभ्यता” इस वर्ग का उदाहरण है. यह सभ्यता हजारो तारो एवं ग्रहो पर निवास करती है और Black Hole की ऊर्जा का भी उपभोग कर सकती है. यह सभ्यता आकाशगंगाओ के मध्य आसानी से विचरण करने मे सक्षम है.

वैज्ञानिक कार्दाशेव के अनुसार यदि कोई सभ्यता ऊर्जा खपत मे कुछ प्रतिशत प्रति वर्ष की औसत रफ्तार से वृद्धि करते रहे तब वह तीव्रता से कुछ ही हजार वर्षो मे एक वर्ग की सभ्यता से दूसरे वर्ग की सभ्यता मे प्रगत हो जायेगी।

हमारी मानव सभ्यता अभी वर्ग 0.3 की सभ्यता है. हम अभी मृत वनस्पति, तेल और कोयले से अपनी मशीनें चलाते है. हम सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का एक बहुत ही सूक्ष्म अंश प्रयोग करते है. लेकिन हम वर्ग एक की सभ्यता का प्रारंभिक चरण देख पा रहे है. इंटरनेट ने वर्ग 1 के संचार माध्यम की तरह सारे विश्व को बांध दिया है।. यूरोपियन यूनियन वर्ग 1 की अर्थव्यवस्था की ओर एक कदम है. अंग्रेजी एक विश्व भाषा के रूप मे उभर चूकी है और विज्ञान, वित्त और व्यापार की भाषा है. आशा है कि कुछ सदियो मे ही वह पृथ्वी पर सभी द्बारा समझी जाने वाली भाषा बन जाएगी. स्थानीय सभ्यताये, भाषायें और रीति रिवाज अपने स्थान पर फलते फूलते रहेंगे लेकिन एक विश्व सभ्यता, विश्व भाषा, विश्व अर्थव्यवस्था का जन्म होगा जो युवा संस्कृति और व्यापारिक बुद्धि द्वारा संचालित होगी.

लेकिन हमारी सभ्यता वर्ग 0.3 से वर्ग 1 मे संक्रमण पायेगी इसकी कोई गारंटी नही है. वर्ग 0 से वर्ग 1 मे संक्रमण सबसे ज्यादा खतरनाक चरण है, शायद कुछ ही सभ्यतायें इस चरण को पार कर पाती है. इस चरण मे साम्प्रदायिकता, कट्टरता और वर्ग भेद अपने चरम पर होते है. जनजातीय और कट्टरता इस संक्रमण को पराजित करने मे कोई कसर नही छोड़ेंगे. हम अपनी आकाशगंगा मे कोई वर्ग 1 की सभ्यता नही देख पा रहे है. इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि कोई भी सभ्यता अभी तक वर्ग 0 से वर्ग 1 मे प्रगति नही कर पायी है और उसके पहले ही नष्ट हो गयी है. या यु कहे के आत्महत्या कर ली है. किसी दिन जब हम दूसरे तारो की यात्रा करेंगें तो हमे उन तारों के ग्रहों पर सभ्यता के अवशेष दिखायी दे सकते है, जिन्होने किसी तरह से स्वयं को नष्ट कर दिया था. लेकिन यह हम तभी देख पायेंगे जब हम स्वयं को नष्ट होने से बचा लेंगे…

जब कोई सभ्यता वर्ग 3 की सभ्यता बन जाती है तब उनके पास अंतरिक्ष मे आकाशगंगाओ के पार जाने के लिये साधन आ जाते है। वे पृथ्वी तक भी आ सकते है. हॉलीवुड की फिल्म 2001 ए स्पेस ओडीसी के जैसे वर्ग 3 की सभ्यताये आकाशगंगाओ मे सभ्यताओं की खोज के लिये यान भेज सकती है.

क्या उच्च वर्ग की सभ्यताओं द्वारा निम्न वर्ग की सभ्यताओं पर आक्रमण संभव है?

हॉलीवुड की फिल्मों मे अन्य परग्रही सभ्यताओं द्वारा पृथ्वी पर आक्रमण दिखाना एक सामान्य बात है। लेकिन यह बाँक्स आफीस पर दर्शक जुटाने तक ही सच है. सच बात ये है के टाइप 3 की सभ्यता को पृथ्वी पर आक्रमण और विजय की कोई अभिलाषा नही होगी.

“इंडीपेन्डेन्स डे” की परग्रही सभ्यता टिड्डियों की तरह ग्रहो पर आक्रमण कर उनके संसाधनों का प्रयोग कर आगे बढते जाते है. लेकिन वास्तविकता मे अंतरिक्ष मे ऐसे असंख्य मृत ग्रह है जिनपर खनिज संसाधनो की कोई कमी नहीं है, इन संसाधनो का प्रयोग स्थानीय सभ्यता के प्रतिरोध के बिना भी किया जा सकता है। (कुछ इसी तरह जेम्स कैमेरॉन की “अवतार” मे हमलावर मानव जाति पेंडोरा पर “अनाब्टेनियम“ के लिये आक्रमण करती है) ध्यान रहे कि वर्ग 0 की सभ्यता ही किसी भौतिक वस्तु की प्राप्ति के लिए आक्रमण करती है. उच्च वर्ग की सभ्यता इतनी उन्नत होती है कि वह इन वस्तुओ को आक्रमण या हिंसा के बिना ही अहिंसक रूप से प्राप्त कर सकती है.

वर्ग 3 की सभ्यता का हमारे लिये रवैया बहुत कुछ हमारे चिंटीयो के लिए रवैये जैसा ही होगा. हम चिंटीयो को कोई नुकसान नहीं पहोचाते है. सिर्फ उपेक्षा कर आगे बढ जाते है. और ना ही चिंटीयो को हमारे आक्रमण की चिंता होती है. हम सिर्फ अपने रास्ते में आने पर ही उन्हे रास्ते से हटाते है. वर्ग 3 और वर्ग 0.3 की मानव सभ्यता के बीच की खाई , हमारे और चिंटी के बीच की खाई से ज्यादा बड़ी और गहरी है।

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