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बादल क्यूँ फटता है?

पृथ्वी के सतह से 20 माइल ऊपर तो स्पेस शुरू हो जाता है लेकिन पृथ्वी के आस पास वातावरण के लेयर्स है, और इसी लेयर्स में बादल तैरते है. विविध प्रकार के ये बादल धरती पर ऋतुचक्र और मोंसुन के लिए जवाबदार है. पर कई बार बादल फटने की घटनाए भी होती है.

आज हम इस आर्टिकल में बदलो के प्रकार, बारिश कैसे गिरती है? और बादल क्यूँ फटते है? इन प्रश्नो के पूर्ण रूप से जवाब जानेंगे.

-बादलों के प्रकार:

(1) एल्ट्रोस्ट्रेटस क्लाउड (Altostratus Cloud)

पृथ्वी की सतह से 2000 से 6000 फ़िट की ऊँचाई पर तैरने वाले बादलों को एल्ट्रोस्ट्रेटस क्लाउड कहेते है. ये बादल तेज़ गति वाले होते है और तीव्रतासे अपना आकार बलदते है. और जल्दी बरस जाते है.

(2) एल्टोक्यूम्युलस क्लाउड (Altocumulus Cloud)

एल्टोक्यूम्युलस क्लाउड एल्ट्रोस्ट्रेटस के भाई जेसे होते है. ये बादल भी 6000 फ़िट तक ही मँडराते है, पर छोटे और सुनहेरे किनारे वाले होते है. सूरज की किरणो में इनका द्रश्य मनमोहक लगता है.

(3) साईरस क्लाउड (Cirrus Cloud)

400 से 18000 फ़िट के अंतर में तैरने वाले बादलों को साईरस क्लाउड कहेते है. पूँछ के आकार के और उन जैसे ये बादल कम घने होते है. इस लिए ये सूर्यप्रकाश को परवर्तित करते है.

(4) सीरीक्यूमूलस क्लाउड (Cirrocumulus Cloud)

सीरीक्यूमूलस क्लाउड तक़रीबन 20000 फ़िट की ऊँचाई तक भ्रमण करते है. ये बिखरे हुए और समुद्री लहेरे जैसे होते है. और छोटे छोटे बादल मिल कर एक बड़ा समूह बनाते है.

(5) सिरोस्ट्रेट्स क्लाउड (Cirrostratus Cloud)

18000 से 50000 फ़ीट की ऊँचाई पर विहार करते बादलो को सिरोस्ट्रेट्स कहा जाता है. ये बादल घने और फैले हुए होते है. इन बादलों के घेराव के कारण अँधेरा छा जाता है और मौसम गमगीन हो जाता है. इन बादलों के आधार पर भारी से अति भारी बारिश की आगही की जाते है.

(6) क्यूमूलोनिम्स क्लाउड (Cumulonimbus Cloud)

धरती की सतह से 50000 – 70000 फ़ीट की ऊँचाई पर तैरते बादलो को क्यूमूलोनिम्स कहेते है. ये बिजली, तूफ़ान और बवंडर के लिए जवाबदार होते है. इन्हें मम्माट्स भी कहेते है. और इन बादलो के आधार पर तूफ़ान की आगही की जाती है.

कुछ बादल बहोत नीचे होते है, इतने नीचे की उन्हें हम अपने हाथो के पकड़ सकते है. जी हाँ जिन्हें हम haze या कुहरा कहेते है. ज़मीन पर फैला धुँध या कुहरा भी एक बादल का ही प्रकार है. कुहरा जब ऊपर जाता है तब वो स्ट्रेटस की केटेगरी में आ जाता है.

-बारिश कैसे गिरती है?

पानी के छोटे छोटे लाखों-करोड़ों बिंदुओ से मिलकर बादल बनते है. धरती से पानी भाफ के रूप में इवेपोरेट होके ऊपर जाता है. ऊपर कम तापमान की वजह से भाफ ठंडी हो जाती है और धूल के छोटे छोटे मोनिक्युलस के साथ टकराती है. इस टकराव के साथ भाफ का फिरसे पानी की बूँदो में रूपांतर हो जाता है.

इस तरह लाखों बिंदु मिलके बादल बनते है और ये बादल इतना भारी होता है के हवा में तैर नहीं पाता और धरती पर बारिश के रूप में बरस जाता है. कम टेम्प्रेचर में बरसात के ये बिंदु हवा में ही जम जाते है और स्नोफ़ोल होती है या ओले गिरते है.

-बादल कैसे फटता है?

बादल फटने से बड़े पैमाने पर हम नुक़सान होते हुए सुनते है. ऐसी आपदा में दुःख के साथ आसचर्या भी होता है के आख़िर ऐसा कैसे होता है.

ऐसी घटनाए ख़ासकर पहाड़ी विस्तार में होति है. भारी हवा पहाड़ों से टकरा कर ऊपर चढ़ती है. साथ ही बादल भी उनके साथ ऊपर उठते है. ऊँचाई पर जाने पर टेम्प्रेचर कम होने लगता है. ऊपरी हवा का दबाव और ठंड बादलों को बेहद घना बनती है. जब की नीचे से आती हवा का दबाव उसे बरसने नहीं देता. इस कस्मकस में बादल में पानी जुड़ता जाता है और बर्फ़ में परिवर्तित होता जाता है. अंत में घनत्व बढ़ते से एक साथ अति मात्रा में बर्फ़ और पानी ज़मीन पर गिर पड़ता है.

जो पानी कई सप्ताहों और महीनो तक धीरे धीरे गिरना चाहिए वो कुछ ही घंटो में एक साथ गिर पड़ता है. इतने पानी से कई बड़े बाँध टूट जाते है और पानी चारो और क़हर बन के टूट पड़ता है.

One Commnet on “बादल क्यूँ फटता है?

  1. sir mai v ek isi tupe ka channel open kiya hu or aapse kuch suggestion ye lena chahta hu kaise start karu so help me

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