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दुनिया की सबसे खतरनाक तलवारें (The Greatest Sword)

दुनिया के इतिहास में आज एक ऐसी तलवार की बात करनी है जो विख्यात और बेजोड़ थी. नाम है “दमास्कत स्टील तलवार” जो मूल भारतीय शस्त्र नीति पे आधारित थी और भारत में ही बनाई जाती थी…

पूरा नाम है अश-शरीफ़ अल-इद्रिसी. ये तलवार दमास्कत तलवार के नाम से प्रचलित बनी. सीरिया की राजधानी दमास्कत में अरब लोग ये तलवार बनाते थे. लेकिन बनाने की रीत उनकी नहीं थी. इसका पहेल चमत्कार 12 वी शताब्दी में दिखा जब यूरोप के आक्रमणखोरो को इजिप्त-सीरिया के सुल्तान सलादिन की फ़ौज ने दमास्कत तलवारों से अश्वों के साथ ही चिर फाड़ दिया. इस तलवार की धार इतनी शार्प के दुश्मन की गर्दन को बचाने वाला धातु का शीरशस्त्र भी काट दिया जाता था.

इस तलवार की और एक ख़ासियत ये के इसे 90° के कोने पर मोड़ा जा सकता है. इस ग़ज़ब विशेषता के कारण पश्चिमी देशों के धातुशास्त्री (Metallurgists) के लिए दमास्कत एक गहन खोज जा विषय बन गई. पर इसके रहस्यों की जानकारी उनके लिए हमेशा एक चैलेंज ही रही.

इस प्रभावशाली फ़ोलादी धातु को Damascus Steel नाम का लेबल मिला लेकिन ये नाम भी भ्रामक था. अंग्रेज़ी शब्द Steel प्राचीन जर्मन शब्द Stahal से आया है, और ये Stahal शब्द मूल संस्कृत शब्द ‘स्तकती’ से बना है. जिसका अर्थ होता है प्रतिकार करना.

लेकिन इस धातु को दिए गए ग़लत नाम का असली भारतीय नाम वूत्ज (Wootz) है. ये शब्द भी कन्नड़ भाषा के वूकुनु शब्द का अपभ्रंश है. 500 ईसा के आस-पास समग्र दक्षिण भारत में उच्च स्तर के लोहे से अस्त्र/शस्त्र बनाए जाते थे.

इस कवोलिटी का शस्त्र बनाने के लिए लोहे में 0.10% से 1.5% कार्बन मिलाया जाता है. इस प्रमाण से ज़रासी भी ऊँच नीच बहोत बड़ा परिवर्तन ला सकती है. इसके साथ ही लोहे में मेगेनिज, क्रेमियम, सिलिकोंन, निकल और वेनेडियम भी मिलाया जाता था. ये बात आरब धातुशास्त्री जान गए. कैसे जान गए?

तो नोधनिया इतिहास के अनुसार 12 वी सदी में कई यहूदी केरल बस गए थे और वहाँ से तलवार बनाने की ये तकनीक अपने साथ आरब देशों में ले गए. और यहाँ से इस तलवार को बड़े पैमाने पर आरब में बनाया जाने लगा.

इस ख़ूँख़ार तलवार ने कई बस्तियाँ उजाड़ दी, तो कई इतिहास भी बदल दिए. ये तलवार आज भी लाजवाब है. ऐसी ही एक तलवार है पूर्वी देश जापान की सामूराय जिसे कताना भी कहेते है. इसे 14 वी सदी से बनाया जाता है.

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