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ग्रीनलैंड द्वीप

धरती के उत्तरी छोर पर बसा 21,75,600 किलोमीटर का ये विस्तार बारह महीने पूरा का पूरा बर्फ़ से ढाका रहेता है। यहाँ बसने लायक जगह 5% से भी कम है. यहाँ सिर्फ़ 56,000 के आस-पास लोग रहेते है. नूक ग्रीनलैंड की राजधानी है और वहाँ लगभग 18000 लोग रहेते है.

ये देश भैगोलिक दृष्टि से उत्तर-अमेरिका खंड का भाग है, पर 18 वी सदी से डेनमार्क से अधिकृत राज्य होने के कारण राजकीय रूप से यूरोप से जुडा हुआ है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक़ यह देश तीन अलग-अलग द्वीपों से बना है, जो ग्लेशियर के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

ग्रीनलैंड नाम कैसे पड़ा?

नाम से तो लगता है के ये हरियाला और जंगल विस्तार वाला प्रदेश होगा, पर वास्तव में यह हमेशा चारों और बर्फ़ छाई रहेती है. इसके नाम के पीछे की सच्चाई ये है की सन 981 में “एरिक द रेड” नाम का आदिवासी ग्रीनलैंड के पास आइसलैंड में रहेता था. उसने एक दिन मारपीट के दौरान अपने क़बिले के एक आदिवासी को मार डाला. उस वक़्त ख़ूनी को फाँसी के बदले देशनिकाल करने की सज़ा दी जाती थी. “एरिक द रेड” को हुक्म सुनाया गया के उसे ३ साल तक आइसलैंड के किनारे के आस पास भी भटकना नहीं है. और देश छोड़ कर चेले जाना है.

“एरिक द रेड” अपने 350 वफ़ादार साथियों के साथ बड़े जहाज़ में आइसलैंड को छोड़के नए मुल्क की तलाश में निकाल गया. पश्चिम के और सफ़र करते हुए वो वो लोग एक बड़े बर्फ़ीले विस्तार में पहोचे और वहाँ छोटे मकान बाँधकर रहेने लगे. ज़ाहिर है अब तक इस जगह पर कोई इंसानी बस्तियाँ रहेती नहीं थी, इस लिए इस जगह का अभी तक कोई नाम नहीं था.

सज़ा की अवधि पूरी होने के बाद एरिक और उसके साथी वापस आइसलैंड गए. अब वो वापस ग्रीनलैंड जाके बसना चाहते थे और ज़्यादा लोगों को अपने खोजे हुए नए प्रदेश में लेजाकर बसाना चाहते थे. जिस वजह से आकर्षण उत्पन्न करने के लिए उन्होंने ग्रीनलैंड नाम रक्खा और लोगों को ग्रीनलैंड आने का न्योता दिया. तबसे इस बर्फ़ीले रेगिस्तान को ग्रीनलैंड नाम मिला.

आज ग्रीनलैंड डेनमार्क अधिकृत देश है और वहाँ लोग डेनिस भाषा बोलते है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का ही भाग है पर क़ानूनी तौर पर उसकी अपनी अलग पहेचन और क़ानून व्यवस्ता है.

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