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क्या प्यार एक केमिकल लोचा है? (The Science of Love)



प्यार क्या है?

हकीकत में जब इन्सान प्यार में होता है तब उसके दिमाग का एक खास हिस्सा सक्रिय हो जाता है. जो इन्सान को किसी नशे के सेवन के बाद होनेवाली अनोखी अनुभूति जैसा अहेसास करवाता है. इसी लिए प्यार में इन्सान का दिमाग एक जादुई संवेदना महेसुस करता है. उसे अलौकिक खुशियों का अहेसास करवाता है और इन्सान किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहेता है. जो व्यक्ति प्यार में होता है उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा होता है. और यही बात उसे आम इंसानों से अलग बनाती है.

वास्तव में प्यार एक लत है, एक जुनून है. विज्ञानिको की बात माने तो प्यार अँधा होता है ये बात सो फीसदी सच है… लेकिन इन्सान के दिलोदिमाग में आखिर ऐसे बदलाव क्यूँ होते है? आखिर हमे प्यार क्यूँ होता है.

हमे प्यार क्यूँ होता है?

मिसिगन की फेरिस स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक रॉबर्ट फ्रेअर का कहेना है के इन सबके पीछे इंसानी दिमाग में मौजूद न्यूरोकेमिकल का हाथ है. और वो न्यूरोकेमिकल फेनिल इथाइल एनिमा है. ये रसायन प्यार में पड़े इन्सान को उसके पार्टनर की गलतियों को नज़रन्दाज करवाता है, उसे अनहद ख़ुशीया महेसुस करवाता है, और प्रेमी या प्रेमिका को सबसे उचा स्तर दिलवाता है. दरअसल ये रसायन हम सब के दिमाग में होता है पर प्यार में पड़ी व्यक्ति में यह कुछ ज्यादा मात्र में उत्पन्न होता है. मज़े की बात ये है की इस न्यूरोकेमिकल का स्तर लम्बे समय तक उचे लेवल पर नहीं रहता, और कुछ 2-3 साल बाद ये कम होने लगता है और चार पांच साल बाद उसका प्रभाव ख़त्म हो जाता है.

प्यार के अहेसास की शुरुआत:

मनोवैज्ञानिक आर्थर ओरेंन के अनुसार प्यार होने के लिए संवेदनाओ के साथ अन्य कई चीज़े भी मायने रखती है. आँखे उनमे से एक है… ओरेंन ने एक एक्सपेरिमेंट किया. जिसमे उन्होंने कई अंजान लडके लड़कियों को 90 मिनिट तक एक दुसरे के साथ बातचीत करने को कहा. और उसके बाद 4 मिनिट तक सिर्फ एक दुसरे की आँखों में देखने के लिए कहा. यह एक्सपेरिमेंट ओरेंन ने बहोत सारे लोगो पर किया. प्रयोग क बाद ज्यादातर लोगो का यह कहेना था के आँखों में लगातार देखने की वजह से वो सामने वाली व्यक्ति के प्रति आकर्षित होने लगे थे. आप मानोगे नहीं पर बाद में एक्सपेरिमेंट में शामिल होने वाले 4 कपल ने तो शादी भी कर ली, और 3 लिव इन रिलेशनशिप में रहेने लगे.
प्रेम में नाक भी अहेम भूमिका अदा करता है. हर एक इन्सान की त्वचा से एक अलग ही गंध उत्पन्न होती है. यह गंध नाक द्वारे दिमाग तक पहोचाती है और दिमाग इसे डिकोड करता है. और उस विशेष अजनबी इन्सान के जिन्स की जांच करता है. सामने वाले के जिन की रचना को जांच कर हमारा दिमाग यह तय करता है के वो व्यक्ति हमारी जीवनसाथी बनाने योग्य है के नहीं.

डॉ. आर्थर का कहेना है के किसी भी इन्सान में आकर्षण की प्रक्रिया 80 सेकंड से 4 मिनिट तक शुरू हो जाती है. आकर्षण की इस प्रक्रिया में 55% योगदान हमारी बोडी-लेंगवेज और पर्सनालिटी का होता है, 38% बातचीत के अंदाज़ का, और 7% हम बोलने में कितने कुशल है इस बात पर निर्भर करता है.

रटगर यूनिवर्सिटी (Rutgers University) की सशोधक और “Why we live?” पुस्तक की लेखिका हेलन फिशर ने प्यार को कुल 3 हिस्सों में विभाजित किया है.
तनकी चाह (Attraction)
मन की चाह (Affection)
जनम जनम का साथ (Deep Love)

(1) तनकी चाह (Attraction)

यह वास्तव में वासना है जो सेक्स होर्मोन Testosterone Estrogen नाम के रसायन से पैदा होती है. Testosterone सिर्फ पुरुषो में ही नहीं बलके महिलाओ में भी उतना ही सक्तिया होता है. यह रसायन हमे अपने पार्टनर के साथ समय बिताने और उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए प्रेरित करता है.

(2) मन की चाह (Affection)

इस स्टेज के लिए Dopamine और Norepinephrine जवाबदार है. इस रसायन के सक्रिय होने की वजेह से हमे प्यार जेसा अहेसास होता है. कुछ सुजता नहीं, नींद उड़ जाती है, चैन खो जाता है, और ज़्यादातर समय अपने प्रेमी या प्रेमिका की यादोमें ही बित जाता है. इसके साथ ही Serotonin भी एक्टिव होती है जो हमे प्यार में पागल सा बना देता है.

(3) जनम जनम का साथ (Deep Love)

यह अवस्र्था आकर्षण के बाद आती है जब सम्बन्ध लम्बे समय तक चलता है. इन्सान आकर्षण की अवस्था में लम्बे समय तक नहीं रह सकता. लेकिन आसक्ति के कारन संबंध लम्बे समय तक चलता है जो दो व्यक्तिओ को जीवन भर साथ रहेने के लिए और परिवार चलाने के लिए मदद करता है. इस अवस्था में दिमाग में Oxytocin और Vasopressin नाम के 2 होरमोंस उत्पन्न होते है जो हमे सामाजिक एकरूपता में मदद करते है. Vasopressin किडनी को नियंत्रित करने का काम भी करता है और पुरुषो में आक्रामकता भी जगाता है जो अपने परिवारके रक्षानात्मक रवैयेके लिए ज़रूरी है.

अब भाई वैज्ञानिको और विचारशील लोगो जे लिए प्यार चाहे कुछ भी हो लेकिन आज यह माना जाता है के प्यार एक अहेसास है, एक फिलिंग है एक अनोखा अनुभव है. प्रेमी मानते है के प्यार एक महेसुस करने की चीज़ है. जो कुदरत द्वारा दी गई हमे एक भेट है. इस तरह प्रेमियों के लिए तो प्यार बस मात्र प्यार ही है…

2 Comments on “क्या प्यार एक केमिकल लोचा है? (The Science of Love)

  1. Apke universe ke video hame bahut ache lagte he ap mere no par universe me video bheje mera no he 7984575602 my name farid plees contact me. Thank u

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