क्या धरती पर समुद्र तल सब जगह पर एक समान है?

धरती पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव सब जगह पर एक जैसा नहीं है. गुरुत्वाकर्षण बल के कम ज्यादा होने की वजह से महासागरो की सतह पर पानी के लेवल में भी कुछ जहाहो पर गड्डे पड़े हुए है. सब से बड़ा गड्डा भारत की दक्षिण में हिन्द महासागर में बना है.

कुछ साल पहेले यूरोपियन स्पेस एजंसी के GOCE नाम के सेटेलाईट ने हिन्द महासागर में पड़े इस गड्डे का नाप निकाला तब चोकादेने वाले आंकड़े सामने आये. महासागर की सतह पर पूरा 2000 किलोमीटर के व्यास (Diameter) का एक बहोत बड़ा गड्डा बना हुआ है, जो समुद्र तल (Sea-Level) से 120 मीटर (395 फीट) निचे है.

लेकिन अगर आप इस महासागर से किसी जहाज में गुजरेंगे तो आपको इस गड्डे के होने की कोई अनुभूति नहीं होगी. इसका कारण ये है के इस गड्डे के व्यास के अन्दर जाने के बाद जहाज एकदम से गड्डे में नहीं उतर जाता. पर पुरे 1000 किलोमीटर केंद्र की तरफ गति करने के बाद जहाज समुद्र तल से 120 मीटर निचे उतरता है. इतने लम्बे ढलान के बाद अब वापस चढ़ाई भी 1000 किलोमीटर की तय करनी होती है. उसके बाद जहाज फिर से 120 मीटर ऊपर आता है. इस उतार और चढ़ाई के 2000 किलोमीटर के अंतर को तय करने में सामान्य तौर पे जहाज को 3 दिन का समय लग जाता है. अतः 3 दिन तक 2000 किलोमीटर का विशाल सफ़र तय करते वक्त जहाज में बैठे किसी व्यक्ति को ये पता नहीं चल पाता है के वो एक गड्डे में से होकर गुजरे है.

आखिर इतना बड़ा गड्डा हिन्द महासागर में बना कैसे?
इसका जवाबा यह है की, धरती पर जेसे पहाड़ और खाईया होती है वेसी महासागरो के भीतर भी होती है. हिन्द महासागर में भी उस जगह पर समंदर के भीतर पर्वतो के बिच बड़ी खाईया मोजूद है. उस वजह से वहा पृथ्वी का Mass (द्रव्यमान) कम है. और Mass की कमी के कारण वहां पर गुरुत्वाकर्षण बल कम हो जाता है. जिस वजह से वह गड्डा बहा हुआ है.

GOCE सेटेलाईट के अनुसार सिर्फ हिन्द महासागर के मध्य में ही नहीं परंतु दक्षिण भारत, उत्तर अटलांटिक महासागर और ऑस्ट्रेलिया के पास प्रशांत महासागर में भी गुरित्वाकर्षण बल में कमी या बढ़ोतरी पाई गई है.

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