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क्या आप अंतरिक्ष में जाना चाहते है? (Space Travel)

क्या आप जानते है की आज अंतरिक्ष में सिर्फ़ एस्ट्रोनोट्स ही नहीं बल्कि अन्य पृथ्वीवासी भी जा सकते है.

दस साल तक नासा के साथ काम करने के बाद उससे अलग हुए साइंटीस्ट माइक सर्फ़ेडिनी ने ख़ुदकी ही एक स्पेस एजेंसी शुरू कर दी. आज उनकी कंपनी Axiom Space लोगों को स्पेस ट्रैवल करवा रही है.

सन 1961 में स्पेस में जाने वाले सबसे पहेले इंसान बने यूरी गागरीन और उनके बाद कई सारे एस्ट्रोनोट स्पेस रिसर्च के लिए अंतरिक्ष में आते जाते रहे है. ये वो लोग थे जो वैज्ञानिक थे, एक्स्पर्ट थे. पर धरती का कोई आम इंसान अबतक टूरिजम के लिए स्पेस में नहीं जाता सकता था. लेकिन ये सम्भव हुआ गागरीन के स्पेस अभियान के 40 साल बाद, सन 2001 में. जब कोई अनट्रेंड, नॉन साइनटीस्ट, अन एक्सपिरीयन्स आदमी स्पेस में गया. नाम था डेनिस टीटो. टीटो एक अमेरिकन बिज़नेसमेन थे. और स्पेस में जाना उनका सालों पुराना सपना था. उनको 1 साल तक ट्रेनिंग देने के बाद सन 2001 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में भेजा गया और वो वहाँ 8 दिन तक रहे. टीटो की टूर के बाद साउथ आफ़्रिका के बिज़नेस मेन मार्क शटलवर्थ स्पेस में गए और उन्होंने भी वह 8 दिन गुज़ारे. उनके बाद तीसरी अंतरिक्षयात्री बने अमेरिकन एंतरप्रोनियोर कम साइंटीस्ट ओल्सन. और इस तरह क़रीब 7 नॉन एक्स्पर्ट लोग अब तक स्पेस में जा चुके है.

तो सवाल ये उठता है के आख़िर वहाँ जानेके लिए हमें करना क्या होगा? तो दोस्तों स्पेस में जानेके लिए हमें बहोत सारे पैसे की और मज़बूत इरादों की ज़रूरत पड़ेगी. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में जाने के लिए पहेले तो एक से डेढ़ साल तक की फिसिकल ट्रेनिंग लेकि होती है.

माइक का कहेना है के जिनके पास पैसे और होसला हो उन्हें हम 8 दिन के लिए स्पेस केम्प में ले जाएँगे. हम माइक की कंपनी के ज़रिए पृथ्वी से 408 किलोमीटर दूर इंटरनेशल स्पेस स्टेशन में 8 दिन तक रहे सकते है. पर इसके लिए हमें एक तगड़ी रक़म देनी होगी, जिसका आँकड़ा सुनके आम इंसान तो क्या करोडोपती को भी चक्कर आ जाए. स्पेस में जानेके लिए हमें देने होंगे पूरे 55 मिलियन डोलर. मतलब क़रीब 370 करोड़ रुपए. इस लिए फ़िलहाल तो एक सुपर रीच इंसान ही स्पेस में जा सकता है.

पर निराश मत हो. नई टेक्नोलोजी हमेशा महेंगी होती है. हो सकता है भविष्य में आंतरिक्ष यात्रा भी हमारे लिए किफ़ायती बन जाए. और स्पेस में जाना आम इंसान के लिए हवाईयात्रा करने के समान हो जाए. और वैसे भी इंसानियत का भविष्य स्पेस ही है…

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