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एरिया ५१ (Area 51)

अमेरिकन सरकार ने कभी भी एरिया 51 के होनेका स्वीकार नहीं किया है और इंकार भी नहीं किया है. एरिया 51 के हर प्रश्न पर अमेरिकन सरकार ने हमेशा चुप्पी साधी है. फिर भी उसके मौजूदगी से हर अमेरिकन वाक़िफ़ है.

यह रहस्यमय और प्रतिबंधित विस्तार अमेरिका के नेवाडा राज्य के दक्षिण में मैजुद है. जहाँ अमेरिकन ऐरफ़ोर्स अत्याधुनिक प्लेन और वेपन का परीक्षण करती है. चारों और पहाड़ों से घिरा ये विस्तार 12,140 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहाँ पर किसिकी भी एंट्री अलाउड नहीं है.

इस विस्तार को इस हद तक सीक्रेट रखा गया है के किसी भी पेसेंजर विमान को एरिया 51 के ऊपर से उड़ाने तक की भी परमिशन नहीं है. हेलिकोपटर इस विस्तार की हमेशा पेट्रोलिंग करते रहेते है. ज़मीन पर सैनिक भी हमेशा रहेते है जिन्हें किसी भी बाहरी व्यक्ति को सूट करने की खुली छूट है. आम तौर पर ऐसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती क्यूँ की जगह जगह पर नो एंट्री के साइन बोर्ड लगाए गए है.

यहाँ काम करने वाले हर कर्मचारी को ख़ास क़िस्म के आइडेंटी कार्ड दिए गये है. सन 1955 में अमेरिकन कम्पनी लोकहीड ने चुपके चुपके जो U-2 टाइप के ख़ास प्लेन साम्यवादी रशिया पर जासूसी करने के लिए बनाए थे, वो इसी रहस्यमय जगह पर बने और उड़े थे. सच पूछो तो एरिया 51 का राज़ तब से शुरू हुआ. क्यूँकि एक तो अमेरिकन सरकार जासूसी के लिए अपने विमान रशिया की अवकाश सीमें में दख़ल करती थी, ऊपर से इस गेरकानूनी कम के लिए अमेरिकन प्रजा के पैसे ख़र्च किए जाते थे. ऐसी क़बूलात खुले आम तो अमेरिकन सरकार कर नहीं सकती थी. इसी लिए उस वक़्त के तत्काल प्रमुख डवाईंट आइजनहोवर ने U-2 प्लेन का अस्तित्व प्रजा से गोपनीय रक्खा, और उसके साथ ही एरिया 51 का अस्तित्व भी गोपनीय ही रखना पड़ा.

पर U-2 की गोपनीयता ज़्यादा समय नहीं चली. सन 1960 में रशिया ने अमेरिकन पायलट गेरी पवर्स के U-2 प्लेन को हमला कर जब तोड़ दिया तब उस जासूस विमान का भांड फूट गया. लेकिन इस बीच एरिया 51 का अस्तित्व सीक्रेट ही बना रहा.

उसके बाद में अमेरिका ने मिंग 21 ओर मिंग 23 जैसे राशियन प्लेन चोरी से हासिल किए. इसके परीक्षण के लिए एरिया 51 का ऐरबेज उसके काम आया. चोरी की करतूत की भि अमेरिकन प्रजा के सामने क़बूलात नहीं की जा सकती इस लिए एरिया 51 के ऐरबेज को टॉप सीक्रेट रखने का कार्यक्रम बरक़रार रहा.

SR-71 और F-117 जैसे अत्याधुनिक विमान का भी परीक्षण एरिया 51 में किया गया. बाद में उसे अमेरिकन वायुसेना को दे दिया गया. आज अमेरिकन आधिकारिक नक़्शे में एरिया 51 का अस्तित्व नहीं है. अमेरिका के सरकारी दस्तावेज़ों में भी इस विस्तार का कोई उल्लेख नहीं मिलता है.

एक क़िस्सा उल्लेखनीय है. हुआ कुछ एसा के सन 1994 में नेवाडा के 5 रहिशो ने कोर्ट में केस दाख़िल किया के वायुसेना एरिया 51 में प्रदूषण फैलारही है. सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का ठीकरा फोड़ते हुए निचली कोर्ट में केस को रैफ़ा दफ़्फ़ा कर दिया. मेटर सुप्रीम कोर्ट तक पहोचि. कुछ सालों बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार का बचाव ना करते हुए ज़रूरी जानकारी पेश करने की नोटिस दी. तब तत्काल प्रमुख बिल क्लिंटन ने अपने विशेष अधिकार का उपयोग कर कोर्ट की नोटिस को ख़ारिज कर दिया. इस आधिकारिक विशेषाधिकार का उपयोग कर अमेरिकन प्रमुख ने साफ़ साफ़ तो नहीं पर ये क़बूल किया के एरिया 51 का अस्तित्व तो है. फिर भले ही वो नाम उन्होंने अपने लेखित या मौखिक बयान में ना दिया हो.

कहा जाता है के आज के समय में एरिया 51 में टॉप सीक्रेट घेरकानूनी एक्षपरिमेंट किया जाते है. वहाँ एलियन का भी आना जाना है. और एलियन तथा इंसानो पर प्रयोग कर विचित्र जीव बनाने के परीक्षण वहाँ होते है. लेकिन ये सब अफ़वाए है. और ख़ास कर ये एलियन वाली बात तो अतिशयोक्ति है. ये बात सच है के एरिया 51 का अस्तित्व है. और वहाँ पर अमेरिका दुनिया से छुपकर परीक्षण भी करता है. लेकिन एलियन का पृथ्वी पर होना और राई का पूरा पहाड़ बनना दोनो बात एक है…

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