आखिर हमे बुखार क्यों आता है?

आम तोर पर जब शरीर में किसी विषाणु या बेक्टेरिया का हमला होता है तब हमारे खून में मोजूद T-सेल उन बाहरी हुमालाखोरो को पहेचान लेते है, और दिमाग के हायपोथेलेमस नाम के अवयव को सूचना दे देते है. हायपोथेलेमस का काम शरीर के तापमान को (98.6° फेरनहीट अथवा 37° सेल्सियस के लेवल पर) संतुलित रखना है. हायपोथेलेमस को चेतावनी मिलते ही वो शरीर का तापमान बढ़ा देता है. जिस से शरीर में गरमी उत्पन्न होती है. फिर भी अगर गरमी कम होने लगे तो हाथ-पाव को कांपने का हुक्म दिया जाता है जिस से घर्षण हो और ज्यादा गरमी पैदा हो सके. आखिरकर शरीर का उष्णतामान 102.2° फेरनहीट या 39° सेल्सियस हो जाता है. परिणाम स्वरुप बुखार चढ़ाता है.

यह प्रक्रिया कुदरती और शरीर के लिए फायदेमंद है. इतने तापमान पर कई विषाणु (बेक्टेरिया) टिक नहीं पाते और उनका सफाया हो जाता है. बेक्टेरिया को शरीर में उनकी वंश-वृद्धि के लिए लोह्तत्व की जरुरत होती है, और बुखार के समय शरीर में लोह्तत्व का भ्रमण मंद हो जाता है जिस वजह से हमलावरों की तादात भी बढ़ नहीं पाती. और T-सेल भी इस अवस्था में अपना कार्य बखूबी निभा सकते है और शरीर को चेप मुक्त कर सकते है.

इसतरह 39° सेल्सियस का बुखार शरीर में घुसे हमलावरों को मारने के लिए कुदरती रोकथाम प्रक्रिया है. शरीर चेप मुक्त होने के बाद हायपोथेलेमस अपने आप शरीर के उष्णतामान को वापस नोर्मल कर देता है…

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